शुभ दशहरा
दशहरा सारे दंश हरे,
दुष्कर्मों से जीव- जीवन रहे परे।
दुविधाएँ दुनिया की "राम" हरे!
दुष्कर्मी को दंड मिले,
जल्दी और सही समय पर मिले।
मानवता, सहिष्णुता को बल मिले,
कुइच्छाओं, स्वार्थीपन पर लगाम लगे,
सादगी को सम्मान,
भोलेपन को विश्वास मिले।
विजयादशमी पर 'दास' तेरा,
हे राम! हे रामा ! हे राम!
बस, यही अरदास करे। 🙏
Greetings!
ReplyDeleteTruth and good people always win.
Amazing write up
ReplyDeleteWow! Amazing
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