लाल - गुलाबी,
नीले - पीले,
हरे - हरियाले।
सीधे - साधे,
और..…
कुछ चमकीले।
सजते - फबते,
मुझ पर, तुझ पर,
ओढ़े - पहने ही लग जाते ' पर ',
तुझ पर , मुझ पर ।
अलमारी की शोभा बढ़ाते,
दिल को सकुन,
मन को आराम पहुँचाते,
सब की आँखों को सुहाते।
किसी किसी का जी भी जला जाते,
कभी-कभी बजट से खेल यह जाते,
मन में अटक जाए, तो बड़ा सताते,
छोटे - बड़े सब को भाते और नाचते।
तन की शोभा, मुख की आभा,
हो चाहे वंदन या फिर हो क्रंदन,
मिले मिलाए, इन्हीं से अभिनंदन।
रेशमी, ऊनी,
सूती, पशमीना,
धागा…बारीक सा धागा,
वस्त्र-वस्तु ने,
ताने-बाने से,
संसार को साधा।
- श्री ए. रेनू