हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Monday, June 23, 2025

चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙


नीले अम्बर की चादर तले,

शांत पड़ी है सारी रात।

सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में,

जैसे उतरी हो कोई बात।


ठंडी-ठंडी हवा के झोंके,

छूकर जाएं मन का द्वार।

झिलमिल तारे गाए गीत,

सपनों का फैला संसार।


नदी किनारे, पथ अनजाने,

चुपके से चलती है बहार।

चांद की किरणें बुनती जाएं,

सुख-स्मृतियों का हार।


मन भी अब चुप हो जाता,

खो जाता इस रात में ।

ठंडी चांदनी चांदी जैसी,

दे शीतलता सौगात में।

                       -रेनू अख़्तर 






Sunday, June 22, 2025

संगीत

               संगीत 


संगीत है आत्मा की आवाज,

हर दिल की ललक और चित्कार।

सुरों की लहरें, स्वर की बूँदें,

जीवन के रंग इसमें झरते।


वीणा की तान, बाँसुरी की बांस,

हर साज में बसता है विश्वास।

कभी खुशी की, कभी पीड़ों की बात,

संगीत में मिलता हर जज़्बात।


बिन शब्दों के कह दे कहानी,

संगीत सजे ,तो हर महफ़िल  “रानी”।

रागों का जादू, तालों की चाल,

मन को बाँधे, मिटाए जंजाल।


संगीत है सृष्टि की भाषा,

प्रकृति भी गाए इसकी परिभाषा।

सुनो तो पत्तों की सरसराहट,

वो भी है एक मधुर गूँज की राहत।


संगीत है सृष्टि का सम्मान,

एकल,वंदन या समूह -गान।

मन - साधना,सिधि - साधना 

यह है सशक्त राम - बा‌ण !!!! 


                 -रेनू अख़्तर 




Thursday, June 19, 2025

योग का वरदान

 🌿 योग का वरदान 🌿


सूरज की पहली किरण संग,

जीवन में लाया नव प्राण।

तन-मन को जो शांत करे,

ऐसा योग महान।


श्वासों की मधुर लय में,

हर पीड़ा हो दूर,

योग सिखाए प्रेम की भाषा,

रखे मन को सदा पुरसकून।


वृक्षासन से सीखें स्थिरता,

भुजंग आसन से शक्ति पाएँ।

योग न केवल व्यायाम है,

जीवन जीना सिखलाए।


तन स्वस्थ, मन निर्मल रखे,

सच्चे सुख का ये उपाय।

आओ मिलकर करें संकल्प,

हर दिन योग अपनाएँ।

-रेनू अख़्तर 


Wednesday, June 18, 2025

मन के रंग

 मन के रंग


मन के भीतर झांक के देखो,

कितने सपनों का मेला है।

कभी खुशी की धूप खिलाए,

कभी दुखों का रेला है।


मन पंछी सा उड़ता जाए,

आशाओं के आकाश में।

कभी थके, कभी बहके,

विचारों के परिपाश में।


मन सागर है भावों का,

लहर-लहर कहानियां।

कभी शांति, कभी तूफां,

जैसे बदलें जिंदगानियां।


मन को समझो, मन को साधो,

मन को उलझन में मत बांटों ।

जो मन जीते, जगजीत वही,

मन की मन से सच्ची प्रीत यही !!

                               -रेनू अख्तर 


Monday, June 3, 2024

दो फूल गुलाब के

दो फूल गुलाब के ,

सनम तेरे नाम के , 

ये मुर्झाते खिल के ,

हम शर्माते मिल के। 


आइने यह दिल के, 

लहूलुहान यह रंग से, 

आज लाज लाल मुख पे, 

नतीजे हमारे संग के। 


 रंगीन फिज़ा, रब्ब की रजा़, 

 मध्म हवा, मन  मनोरमा ।


 सनम! दूर-दूर हम खड़े, 

 पर समां हमारे संग चले, 

 नतीजे यह सच्चे प्यार के, 

  यह दो फूल प्यार के, 

यह दो फूल गुलाब के, 

यह दो फूल गुलाब के। 

                   -श्री ए.रेनू 











Sunday, May 12, 2024

माँ

         माँ 

जीवन ठंडक है, 

ममता की छाँव में। 

जीवन सरल है, 

ममता की नाव में। 


जीवन स्वस्थ है, 

ममता के हाथ में। 

जीवन, जीवन है, 

ममता के नाम में। 


जीवन सफल है, 

सच्चे - ममतामयी 

एहसास में ।

रक्त, अस्थि - मज्जा, 

अस्तित्व, जीवन यह !! 

है माँ ! तेरे ही उपकार से। 


हे माँ ! तुझे प्रणाम ।

हे माँ ! तुझे सलाम। 

हे माँ तुझे कोटि-कोटि। 

 नमन- नमन - नमन। 

                             -श्री ए.रेनू 


Sunday, December 3, 2023

चाबी

            


तेरे-मेरे मन की चाबी, 

एक….. 

वो भी तेरे पास में। 

और, 

मन का तू मौज़ी, 

एक, 

जगह तू टिक जाए। 

ना, 

बस की तेरे बात रे। 

काश ! 

कभी ऐसा हो जाए, 

चाबी, 

हाथ मेरे लग जाए। 

फेंकूँ, 

पार सात समंदर पार, 

खत्म, 

हो जाए सारे फसाद रे! 

घर, 

तेरा-मेरा, मेरा - तेरा की, 

उलझन, 

से मुक्त हो सारे जज़्बात ये । 

खो जाए, 

यह चाबी रब्बा!! रहे 

संग, 

मेरे, मेरा सजना, क्या दिन-क्या रात, रे। 


                         -श्री ए.रेनू 



चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...