🌙 चांदनी रात 🌙
नीले अम्बर की चादर तले,
शांत पड़ी है सारी रात।
सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में,
जैसे उतरी हो कोई बात।
ठंडी-ठंडी हवा के झोंके,
छूकर जाएं मन का द्वार।
झिलमिल तारे गाए गीत,
सपनों का फैला संसार।
नदी किनारे, पथ अनजाने,
चुपके से चलती है बहार।
चांद की किरणें बुनती जाएं,
सुख-स्मृतियों का हार।
मन भी अब चुप हो जाता,
खो जाता इस रात में ।
ठंडी चांदनी चांदी जैसी,
दे शीतलता सौगात में।
-रेनू अख़्तर