हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Saturday, September 17, 2022

"सच की दुकान पर ताला है"

 आज की फिज़ा में, 

ऐ रब्ब तेरे जहान में, 

भ्रष्टाचार  शर्माता है, 

शिष्टाचार  घबराता है। 


ज़रा सम्भल कर चलें हम भी , 

क्योंकि……………….., 

'सच की दुकान पर ताला है।' 

 कथनी और करनी में, 

पूरब - पश्चिम का नाता है। 

कहने - सुनने, बोलने - कहने में, 

वक्र - वक्रोक्ति का बोलबाला है। 

अंध - आधुनिकता के दौर  में, 

नंबर -1 की चाहत की दौड़ में, 

मानव दबा अधिकतर, 

अति लालसा के नीचे। 

यहाँ - वहाँ , जहाँ-तहाँ, ''बस'' 

वक्रगामी नामों का बोलबाला है। 


                         -श्री ए. रेनू 




aaj kee phiza mein,
ai rabb tere jahaan mein,
bhrashtaachaar sharmaata hai,
shishtaachaar ghabaraata hai.
zara sambhal kar chalen ham bhee,
kyonki………………..,
sach  kee dukaan par   taalaa hai.
 kathanee aur karanee mein,
poorab - pashchim ka naata hai.
kahane - sunane, bolane - kahane mein,
vakr - vakrokti ka bolabaala hai.
andh - aadhunikata ke daur mein,
nambar -1 kee chaahat kee daud mein,
maanav daba adhikatar,
ati laalasa ke neeche.
yahaan-vahaan, jahaan-tahaan, bas
vakragaamee naamon ka bolabaala hai.

                                     -ms.a.renu


Wednesday, September 14, 2022

हमारी भाषा 'हिंदी'

 तुझे मुझे जो सुकून दे, 

 दिल की बात बोल दे, 

भाव बन शब्द, शब्द बन भाव, 

मधुर तराने छेड़ दे, 

कटु बहाने छोड़ दे। 

शक्ति यह सिर्फ,

 भाषा में होती है। 

कुदरत के लाखों वरदानों में, 

भाषा  सर्वोपरि होती है। 

अहो भाग्य! तेरा - मेरा 

हमारी भाषा हिंदी है। 

जन - जन के दिल पर, 

 राज यह करती, 

जन तन मन धन का, 

 संचार यह करती, 

सम्मान सिखाती, 

सम्मान दिलाती, 

भाषा - जगत में, 

भाषा - विज्ञान में 

अग्रणी आ जाती। 

ऐसी  सुबोधिनी भाषा, 

'हिंदी 'तेरी और मेरी है। 



हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ। 

                         -श्री ए. रेनू 






Tuesday, September 13, 2022

जख़्म

 जख़्म वही भरते हैं

जो दिखते हैं। 

अनदेखा जख्म न दे, 

खुद को। 

ऐ इन्सान! 


सुना है…. 

कि अच्छे कर्मों, 

 के फल से, 

हम इंसान बनते हैं। 


गुपचुप, कर्म न कर, 

ऐ इन्सान! 

सुना है कि…. 

ऐसा करने वाले, 

आज गुमसुम रहते हैं। 


गुमराह अगर हुआ है, 

ऐ इन्सान!! 

तो सही राह पकड़ ले, 

 इस राह पर तो…… 

गुलामी के निशान मिलते हैं। 


अनचाहे मन से ही सही, 

शंकालु मन से ही सही, 

बस इक बार, 

आज़मा यह बात, 

ऐ इन्सान!! 

अनदेखे जख़्म,

खुद को, 

न दे,,,, 

ऐ इन्सान!!! 

                           -श्री ए. रेनू 




चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...