खिलाड़ी
असल है या नकल है,
लगी इसमें अक्ल है।
दोनों ही तो चमकीले हैं,
शानदार और जहरीले हैं।
दमक भी दमदार हैं,
आवाज़ में झंकार है।
सजते बाज़ारों में,
दोनों की रौनक धमाकेदार है।
सजे गर कंगन में…..,
तो क्या बात है…..!!
पहले की यह खास बात है!
सोचते हो…….?
यह दूसरी चमकदार चीज़ क्या है??
तो सुन लो….. जी,
आसपास वो रहते हैं,
मीठे - मीठे दिखते हैं,
हित - हितकारी रटते हैं,
दिल की दिल में रखते हैं,
शुगरकोट शब्द - भंडारी हैं,
धम्म - धूर्तता के व्यापारी हैं,
इनके आगे दुनिया सारी हारी हैं,
असली खिलाड़ियों के खिलाड़ी है!!!
-श्री ए. रेनू