हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Monday, December 19, 2022

मकान

 चार दीवारें, 

और 

एक छत, 

और 

लो बन गया मकान। 


चाहे हो राजा, 

चाहे हो रंक, 

चले न जीवन, 

इसके बिन। 


सुनो रे साधु! 

सुनो रे बंधु! 

सारे बंधन, 

सारे क्रंदन ।


है बस, 

इन्हीं में, 

बंद। 


खोलो हृदय, 

भरो उड़ान, 

जियो जिंदगी, 

जी भर के। 

जीते जी, 

श्मशान न बने, 

यह मकान। 

                            - श्री ए. रेनू 



Sunday, December 11, 2022

शून्य

 

आसमां में शून्य, 

कि उसका ओर - छोर नही। 

माया में शून्य, 

तो वह बे-मोल नहीं। 

गर हो मनुष्य में शून्य, 

तो मनुष्य का कोई मूल्य नहीं। 


स्थान - स्थान की बात है, 

शून्य तो कभी भी बेमोल नहीं!! 

                   -श्री ए. रेनू 

Saturday, December 3, 2022

खिलाड़ी

         खिलाड़ी 

असल है या नकल है, 

लगी इसमें अक्ल है। 

दोनों ही तो चमकीले हैं, 

शानदार और जहरीले हैं। 

 दमक भी दमदार हैं, 

आवाज़ में झंकार है। 


सजते बाज़ारों में, 

दोनों की रौनक धमाकेदार है। 

  सजे गर कंगन में….., 

तो क्या बात है…..!! 

पहले की यह खास बात है! 


सोचते हो…….? 

यह दूसरी चमकदार चीज़ क्या है?? 


तो सुन लो….. जी, 

आसपास वो रहते हैं, 

मीठे - मीठे दिखते हैं, 

हित - हितकारी रटते हैं, 

दिल की दिल में रखते हैं, 

शुगरकोट शब्द - भंडारी हैं, 

धम्म -  धूर्तता के व्यापारी हैं, 

इनके आगे दुनिया सारी हारी हैं, 

असली खिलाड़ियों के खिलाड़ी है!!! 


                          -श्री ए. रेनू 






चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...