रच कर धरा को….
रब्ब ने !!
ज़र्रे - ज़र्रे को…..
फूलो - फलो की दुआ दी।
सींच……
पूरे महीने नौ !!!
कोख में !!
माँ ने बच्चों को…
इंसान होने की दुआ दी।
खोल के
दामन अपना..
धरती ने ......
पशु - प्राणी…
नर-नारी सबको!!
उदर - तृप्ति की दुआ दी।
मन पूछे….
आज जाने क्यों ??
जीवन में हमने…
किस - किस को..
क्या - क्या….. दुआ दी।
-श्री ए. रेनू