हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Thursday, May 4, 2023

मितवा

 'मितवा' 


मन में रहे मितवा, 

और 

मन की करे मितवा। 

मार के मन मेरा….. 

जन जन की सुने मितवा। 

मन मेरा यही सोचे… 

क्यों ? मैं  नहीं.. 

क्यों?? मैं ही नहीं… 

जन - जन में । 

जबकि… तू है .. मेरा 

सिर्फ मेरा!!!! 

मितवा। 

             -श्री ए. रेनू 

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Thanks ☺️

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