हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Tuesday, November 22, 2022

सर्दी आई, सर्दी आई ।

 सर्दी आई, सर्दी आई, 

साग-सब्जी की बहार आई। 


आलू, मूली, गोभी के परांठे, 

ऊपर जिनके धनिया पत्ती साजे ।


बाज़ारों में फल की कतार लग जाए, 

सेब, संतरा,अमरूद और खजूर, 

 मूँगफली, काजू, मेवे और चिलगोजे़।



जो जी चाहे, मिलजुल कर खाएं, 

सर्दी का लुत्फ उठाएं, 

सर्दी में सब सेहत बनाएं।

                          - श्री ए. रेनू 

Monday, November 14, 2022

बाल- दिवस

 बाल - दिवस आया, 

बालकों का दिन आया, 

हर बालक के दिल में, 

उम्दा- उमंग लाया। 

सगी - साथी वही होगें,

विद्या - विद्यालय भी वही होगें, 

गुरुजन भी वहीं होगें, 

इन सब का अलग अंदाज लाया।

देखो- देखो, बाल दिवस आया। 


दुकानें सजती, झूले लगते, 

खेल - कूद और महफिल सजती, 

गुरुओं की ख़ुशनुमा तबीयत दिखती, 

बच्चों को बचपन दिलाने आया, 

बड़ों को बचपन याद दिलाने आया, 

देखो - देखो, बाल - दिवस आया। 


हाँ - हाँ!! जन्म दिन है आज, 

चाचा नेहरू का जन्म दिन है 'आज' ,

सबका दिन बहुत खास है आज, 

खुशियों और उमगों के संग- संग, 

चाचा नेहरू का आशीर्वाद लाया, 

देखो- देखो, बाल दिवस आया ।


चेहरे अपने नूरानी लिए,

मन में बड़ी उमंग लिए,

मस्ती के सब तराने लिए,

बड़े गर्व से पूरे हक लिए,

बाल दिवस मनाने के लिए,

निकले पूरे हक से आज, 

आज तो है हम बच्चों का राज। 

देखो- देखो बाल दिवस आया ।


सबका दिल मंगलमय हो आज।

हम बच्चों की तरफ़ से, 

सबको सादर प्रणाम, 

सबको  हार्दिक धन्यवाद। 

बाल- दिवस की शुभकामनाएँ, 

कर लो जी दिल से स्वीकार। 

                      - श्री ए. रेनू 





Sunday, November 13, 2022

कि जीवन खिले....

 आओ कुछ करें, 

कि जीवन खिले। 

आओ कुछ करें, 

कि ठहराव मिले ।

आओ तो देखे…… 

कि भागमभाग क्यों है ?

सौ कामों पर एक ही, 

हाथ क्यों है…..?

मेरा- मेरा करे, 

हर कोई, 

हम - तुम की तो… 

बात ही नहीं है। 


आओ… 

आओ…. 

कुछ कदम साथ चलें, 

कि कुछ आराम मिले। 

जीवन का आभास मिले, 

अपनत्व का संसार मिले। 

                    -श्री ए. रेनू 


Sunday, November 6, 2022

बुलबुल और शिकरा

 'बुलबुल और शिकरा' 


इक नन्ही घायल, 

बुलबुल को, 

मिला… 

शिकरे यारों का राजा ।

बड़े नाज़ो से रखा, 

बड़े सालों तक रखा, 

मन के पिंजरे में रखा।

फिर इक दिन… 

पिंजरे को, 

खोला, 

बोला, 

उड़ जा…. 

कि जाता मैं…. 

लेने को अपनी रानी। 

बुलबुल..?..?. 

गुमसुम सी होली, 

चुप्पी से बोली,,... 

उड़ना मैं भूली!!! ।

शिकरे ने भरी उड़ान, 

और उड़ गया …… !!! 

                          - श्री ए. रेनू 


चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...