हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Sunday, December 3, 2023

चाबी

            


तेरे-मेरे मन की चाबी, 

एक….. 

वो भी तेरे पास में। 

और, 

मन का तू मौज़ी, 

एक, 

जगह तू टिक जाए। 

ना, 

बस की तेरे बात रे। 

काश ! 

कभी ऐसा हो जाए, 

चाबी, 

हाथ मेरे लग जाए। 

फेंकूँ, 

पार सात समंदर पार, 

खत्म, 

हो जाए सारे फसाद रे! 

घर, 

तेरा-मेरा, मेरा - तेरा की, 

उलझन, 

से मुक्त हो सारे जज़्बात ये । 

खो जाए, 

यह चाबी रब्बा!! रहे 

संग, 

मेरे, मेरा सजना, क्या दिन-क्या रात, रे। 


                         -श्री ए.रेनू 



Sunday, November 12, 2023

दीपावली

 प्रिय पाठकगण। 

सादर प्रणाम! आप सभी को दीपावली की

हार्दिक शुभकामनाएँ। 

ईश्वर की कृपा हम सब पर बहुतायत से

बनी रहे और आने वाला वर्ष हमारे लिए

अच्छा स्वास्थ्य, तरक्की, खुशियाँ लेकर आए।

दीपावली के शुभ अवसर पर आपके लिए

एक कविता प्रस्तुत है-



             दीपावली 

दीप, धन- धान्य, दान, 

श्रम - श्रद्धा, संस्कृति - संस्कार, 

त्याग- आदर, आस्था, भक्ति- शक्ति, 

दीपावली राम - जीवन का यशोगान। 


मन समृद्धि, तन नियंत्रण, धन वृद्धि, 

राम रमैया संग कुबेर - लक्ष्मी सुश्री, 

वर्ष में यह सुनिश्चित सुयुति बनती, 

आलौकिक महिमा चहुँओर बरसती। 


भगवन! भाग्य सबका सँवारें, 

शुभ-लाभ, स्वास्थ्य, सद्बुद्धि, 

सद्भाव, सदाचार, उन्नति, वृद्धि, 

दे जन-जन का जीवन निखारें। 


मानव इक बात भी समझ जाए, 

दीपावली रामा के संघर्ष-त्याग, 

के बाद आई।

अंहकार से  रामा ने की, 

सीधी लड़ाई। 

जीवन चक्र का चित्रण दिखाया, 

हमको मुक्त जीवन का राह दिखाया, 

तब जाकर हमने…..!!!!!!!

दीपावली का त्योहार है पाया। 


लगता है मुझको ऐसे, 

जैसे संग सिया और लक्ष्मण, 

रामजी हम सब से कहते.. 

"मानव! तन तृप्ति सर्वोपरि, 

पर मन संतुष्टि सबसे भली।" 


"शुभ - लाभ, शुभ दीपावली।" 

                          -  श्री ए.रेनू 

"मुग्धया ब्लॉग" की तरफ से आप सभी को

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏



Monday, October 30, 2023

चाँद और करवा - चौथ

   चाँद और करवा - चौथ 


नीली सुबह का सुनहला सुहाग, 

धुंधली आभा में छिपता चाँद, 

 करवा लेकर आने का, 

वादा करता चाँद! 


खुद पर इतराएगा, 

शायद इसीलिए, 

 "करवा" पर, 

थोड़ी- बहुत देर  से आएगा। 


मेरी सखियाँ को इंतजार करा, 

 जीवंतमुखी, सुंदर - सौभाग्या, 

 सुख  अनिभूति  कराएगा। 


नर-नारी से श्रद्धा, 

सृष्टि से श्रेष्ठता पाएगा। 

चाँदनी संग  चाँद, 

आशीर्वाद बरसाएगा।

शुभ मधुमय करवा-चौथ लाएगा।

                         -  श्री ए. रेनू 


आप सभी को "मुग्धया ब्लॉग" की तरफ से "करवा - चौथ " की हार्दिक - शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद। 🙏 


    -श्री ए. रेनू 


Tuesday, October 24, 2023

शुभ दशहरा

 शुभ दशहरा 

दशहरा सारे दंश हरे, 

दुष्कर्मों से जीव- जीवन रहे परे। 

दुविधाएँ दुनिया की "राम" हरे! 

दुष्कर्मी को दंड मिले, 

जल्दी और सही समय पर मिले। 

मानवता, सहिष्णुता को बल मिले, 

कुइच्छाओं, स्वार्थीपन पर लगाम लगे, 

सादगी को सम्मान, 

भोलेपन को विश्वास मिले। 

विजयादशमी पर 'दास' तेरा, 

हे राम! हे रामा ! हे राम! 

बस, यही अरदास करे। 🙏

Thursday, September 28, 2023

Love you जिंदगी 💖💕❤️








आजा जिंदगी कि जीना है तुझे, 

यकीन मान…. !! 

इस दुनिया की नहीं है.. 

अब परवाह मुझे  !! 

हक तूने जो सारे दे रखे हैं। 

मेरे हिस्से के , 

मेरे लिए  , 

सिर्फ , मेरे लिए रख रखे हैं । 

ऐ जिंदगी !! तेरी आँखों से, 

 तेरी आँखों में , पढ़कर मैंने, 

दिलो जान , दिलो-दिमाग में रखे हैं। 

एक बार आजा, 

ऐ जिंदगी  !!! 

बस, एक बार आजा । 

कि तुझे जीने के, 

लाखों अरमान हमने पाल रखे हैं। 

Love you जिंदगी 💖💕💖

                             -  श्री ए. रेनू 


Aaja jindagee ki jeena hai tujhe, 
yakeen maan…. !! 
is duniya kee nahin hai.. 
ab paravaah mujhe  !! 
hak toone jo saare de rakhe hain. 
mere hisse ke , 
mere lie  , 
sirph , mere lie rakh rakhe hain . 
ai jindagee !! teree aankhon se, 
 teree aankhon mein , padhakar mainne, 
dilo jaan , dilo-dimaag mein rakhe hain. 
ek baar aaja, 
ai jindagee  !!! 
bas, ek baar aaja . 
ki tujhe jeene ke, 
laakhon aramaan hamane paal rakhe hain. 
love  you jindagee 💖💕💖
                              - shri A.Renu.

Saturday, June 17, 2023

आरज़ू



आरज़ू कर…. 

ऐ इन्सान…. 

कि जीवन जगे। 

आरज़ू कर…. 

 ऐ इन्सान….. 

कि जीव खिले। 

आरज़ू कर…. 

ऐ इन्सान…… 

कि भाव जगे। 

आरज़ू कर… 

ऐ इन्सान… 

कि भाग जगें। 

आरज़ू कर…. 

ऐ इन्सान…. 

कि हिम्मत मिले। 

आरज़ू कर….. 

ऐ इन्सान… 

कि हम सच सुने। 


दुआ कर ऐ इन्सान… 

कि झूठ पर लगाम लगे, 

इंसान में इंसानियत, 

रूह में रूहानियत, 

जीवन में जीवन, 

और…. 

धरती पर इंसान रहे।।। 

                     -श्री ए. रेनू 



Friday, May 26, 2023

दुआ

       


रच कर धरा को…. 

रब्ब ने !! 

ज़र्रे - ज़र्रे को….. 

फूलो - फलो की दुआ दी।

 

सींच…… 

पूरे महीने नौ !!! 

 कोख में  !! 

माँ ने बच्चों को… 

 इंसान होने की दुआ दी। 

   

खोल के

दामन अपना.. 

धरती ने ......

पशु - प्राणी… 

 नर-नारी सबको!! 

उदर - तृप्ति की दुआ दी। 

 

मन पूछे…. 

 आज जाने क्यों ?? 

जीवन में हमने… 

किस - किस को.. 

क्या - क्या….. दुआ दी। 

                        -श्री ए. रेनू 


 


Wednesday, May 17, 2023

तेरी छवि

 हूबहू  थी……!! 

पर तुम नहीं थीं। 

रुबरु थी….!! 

पर तुम नहीं थीं। 


आँखें.…. खुली थीं.. ।

नींद  भी नहीं थी….!! 

धड़कन में धड़क थी.. 

सीने में तड़प भी थी। 


हे मेरे सनम, 

पर सामने तुम नहीं थीं !! 

तेरी छवि थी !!! 

तुम से अधिक हसीन थी !! 

बेजुबान थी…. 

पर बेलगाम थी। 

लाजवाब थी। 

तेरी तस्वीर…. 

 मेरे सनम, बेमिसाल थी।!! 

               -श्री ए. रेनू 


Thursday, May 4, 2023

मितवा

 'मितवा' 


मन में रहे मितवा, 

और 

मन की करे मितवा। 

मार के मन मेरा….. 

जन जन की सुने मितवा। 

मन मेरा यही सोचे… 

क्यों ? मैं  नहीं.. 

क्यों?? मैं ही नहीं… 

जन - जन में । 

जबकि… तू है .. मेरा 

सिर्फ मेरा!!!! 

मितवा। 

             -श्री ए. रेनू 

Thursday, March 23, 2023

मार्च का यौवन

 चहके चिड़िया, कूहके कोयल,

ले आया...

समय…. 

फिर से, 

धरा पर,

 मार्च का यौवन। 


कोमल पत्ते, रंग रंगीले, 

नव यौवना से भरमीले। 

मन को भाते हाथ न आते, 

दूर शाख पर गतिमान इतराते। 


शोभा प्रकृति की बढ़ाते, 

नैनौ से मन में बस जाते, 

देख, रब्ब की!! 

 यह कारीगरी… 

नतमस्तक हम हो जाते। 🙏🙏 

                        -श्री ए. रेनू 


Wednesday, March 15, 2023

पुतला यह माटी का?

 पहन कर कपड़े उज्जले

बने आज , यह , वो… 

सब… यजमान… 

कहूँ , कहूँ  सब  'मैं' कहूँ, 

बस…… सब मेरी मान। 


जिंदगी बैठा दी दाव पर , 

बाँध घुंघर, साथ सयापे लाख, 

वह भी मस्त हो गई…. 

समझ 'खुद'  को भाग्यवान। 


बुद्धि बंद, अल्फाज़ चंद. 

श्वेतांबर के श्रेष्ठ पत्र पर , 

बस  …. बातें चंद….। 

….उसकी मनपसंद….. ।


मैं , मैं , मैं , मैं और बस मैं!!! 

मैं हूँ ,,,, मैं ही हूँ… 

जी, सबसे अच्छा। 

हाँ , सबसे सच्चा। 


देख सुन….. मत।।। 

और किसी को…. 

कहूँ…. कहूँ.. सब

 बस मैं कहूँ सब… 

मुझे सुनो….. बस

सुनो.  सुनो… बस।


रख समझ को परे, 

अक्ल को भेज परे, 

चाहे कहीं घास चरे, 

दृष्टि मायामंच पर रहे। 


कान सदा मुझ पर रहे, 

भविष्य चाहे आँच पर जले, 

भूख लगे न, न प्यास लगे, 

इतना भी तुझे ध्यान रहे। 


बैठी दाव पर जिन्दगी, 

सोचे…… 

 पुतला यह माटी का? 

न जाने?? 

किस ओर चला ??? 

              -श्री ए. रेनू 


 


Sunday, March 5, 2023

मुहब्बत और बेवफाई

 मुहब्बत का दस्तूर ही ऐसा होता है, 

कोई खून के आँसू पीता है, 

और..... 

कोई जश्न मनाता है।

कोई महफिल में सजता हैं, 

और....... 

कोई तन्हाई में सिसकता है।

वफा तड़पती है, 

वेवफाई संवरती है, 

धड़ल्ले से चहकती है। 

और......... 

आदत हो जाती है जब वफा को, 

तड़प के मर कर जी जाने की..., 

तभी.... हाँ...... तभी.!!! 

वेवफाई लौट कर आती है, 

पास वफा के, 

ना...... जी....... ना...., 

नहीं आती मनुहार को, 

बस आती है...!! 

बताने अपने अफसाने, 

अपनी आप बीती बात  बताने को, 

जी हाँ!!!.... 

वेवफाई को तहज़ीब भी नहीं होती।।!! 

                                - श्री ए. रेनू


Sunday, February 26, 2023

धागा... बारीक सा

 लाल - गुलाबी, 

नीले - पीले, 

हरे - हरियाले। 


 सीधे - साधे, 

 और..… 

कुछ चमकीले।


सजते - फबते, 

मुझ पर, तुझ पर, 

ओढ़े - पहने  ही लग जाते ' पर ', 

तुझ पर , मुझ पर । 


अलमारी की शोभा बढ़ाते, 

दिल को सकुन, 

मन को आराम पहुँचाते, 

सब की आँखों को सुहाते।


किसी किसी का जी भी जला जाते, 

कभी-कभी बजट से खेल यह जाते,

मन में अटक जाए, तो बड़ा सताते,

छोटे - बड़े सब को भाते और नाचते। 


तन की शोभा, मुख की आभा, 

हो चाहे वंदन  या फिर हो क्रंदन, 

मिले मिलाए, इन्हीं से अभिनंदन।


 रेशमी, ऊनी, 

सूती, पशमीना, 

 धागा…बारीक सा धागा, 

वस्त्र-वस्तु ने, 

ताने-बाने से, 

संसार को साधा। 

           - श्री ए. रेनू 




चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...