हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Sunday, July 31, 2022

तीन रंग तिरंगे के

 

तीन रंग तिरंगे के, 

चौथा रंग चक्र का। 

केसरिया ऊपर, हरा , नीचे साजे, 

बीच सफ़ेदी संग, नीला चक्र भागे ।

खादी के यह खालिस, जहीन धागे, 

प्रतिपल भारत  के  माथे पर साजे। 


आन, बान और शान, 

तेरी, मेरी असली पहचान ।

तिरंगा सौंदर्य, तिरंगा सौगात, 

इससे साजे हर राष्ट्रीय त्योहार ।

तेरा - मेरा सबका अपना और 'प्रिय' 

देख ,तिरंगा हर भारतीय जिए ।

माँ जननी, माँ भारती, 

तुझे वंदन, तुझे प्रणाम, 

तेरे सपूतों में , तिरंगे का पहला नाम, 

कर कबूल अपने चरणों में, 

 हम बच्चों का सादर प्रणाम। 

हम बच्चों का सादर प्रणाम। 

           'जय हिंद'। 

                                 -   श्री ए. रेनू 


Thursday, July 28, 2022

रख दूरी

 


कुछ हो जाए , 

अपनापन कम न करना ।

छोटी होती दुनिया में, 

बड़प्पन कम न करना ।

रिश्तों की नाजुक डोरी की, 

पकड़ कम न करना। 

कोई रूठ जाए , 

मनाने की कोशिश कम न करना। 

धोखा देने वाले से  '  रख दूरी '

अधूरी चाहत का गम न करना।

                              - श्री ए. रेनू 



Tuesday, July 19, 2022

माँ - भारती के नन्हे लाल

 हम !!! 

 माँ - भारती के नन्हे लाल, 

हाथ जोड़ कर करें,

रब्ब से प्रार्थना!! 

बड़ों से फरियाद!!! 


न करो नफ़रत की आँधी से, 

धरती का सीना लाल। 

रखो मन में नेक विचार, 

आँखों में श्रद्धा, 

भाल पर प्यार, 

बँटे जन- जन में, 

खुशी और उल्लास। 

दिखे मानस - मुख, 

खुशहाल और सुर्ख - लाल। 


स्वतंत्रता दिवस की बेला में, 

लहराए तिरंगा, फैलाए तिरंगा, 

सच्ची देश - भक्ति का भाव। 

कहेगा तिरंगा लहरा कर 

फिर एक बार। 

बस !!! 

अपने मन की मान्यता मान, 

देश ही पहचान,देश ही मान। 

देश ही जान,  देश ही शान ।


सुन ले बड़े हमारी फरियाद। 

भूल कर सब, देश को रखे याद! 

हे भगवन!! 

मिल जाए, हम बच्चों को, 

स्वतंत्रता दिवस पर यह उपहार। 

माँ भारती! का हो शुभ - श्रृंगार। 

                         - श्री ए. रेनू 





Wednesday, July 13, 2022

दूर कहीं भवन में,

 दूर कहीं भवन में, 

     'थी'

इक हव्वा की बेटी,

और 

इक आदम का बेटा ।

बस जो होना था ,

वही हुआ ,

जी हाँ ।इश्क हुआ ।

काश! के मुहब्बत होती, 

तो भवन, 

भवन होता !! 

सहरा न होता। 

हव्वा ! तेरी बेटी के माथे पर टीका, 

आदम ! तेरे बेटे के सिर पर सेहरा, 

होता। 

इश्क कच्चा, 

मुहब्बत पक्की ।


जमाने में, 

इक नजर 

घुमा के देख लो। 

चाहो तो, 

आज़मा, 

के देख लो। 

- श्री ए. रेनू 


door kaheen bhavan mein,

thee
ik havva kee betee,
aur
ik aadam ka beta .
bas jo hona tha ,
vahee hua ,
jee haan .ishk hua .
kaash! ke muhabbat hotee,
to bhavan,
bhavan hota!!
sahara na hota.
havva! teree betee ke maathe par teeka,
aadam! tere bete ke sir par sehara,
hota.
ishk kachcha,
muhabbat pakkee .

jamaane mein,
ik najar
ghuma ke dekh lo.
chaaho to,
aazama,
ke dekh lo.

Tuesday, July 12, 2022

खुश रहो ।

 बेवकूफ़ों के जनाज़े

सूने होते हैं । 

समझदारों के पीछे 

जमाने होते हैं। 

तो…. 

 तो क्या?? 

समझदार बनो। 

और खुश रहो। 

मरने से पहले भी 

और मरने के बाद भी। 

😊😊😊😊😊

-श्री ए. रेनू


(English Script)

bevakoofon ke janaaze
soone hote hain . 
samajhadaaron ke peechhe 
jamaane hote hain. 
to…. 
 to kya?? 
samajhadaar bano. 
aur khush raho. 
marane se pahale bhee 
aur marane ke baad bhee. 
😊😊😊😊😊
                - shri A. Renu 



Friday, July 8, 2022

जिंदगी सच्ची सौगात

  हाँ! यह सच बात है जिंदगी सौगात है । हर दिन इस में, एक उपहार है। मिल जाए गर 'मुहब्बत' तो जीने में क्या बात है हो गर सच्ची भी, तो जिन्दगी सच में 'सौगात' है। न भी मिले गर , तो गम न कर। कर खुदा से, खुद से मुहब्बत, देख फिर ऐ बंदे !! जीने में क्या बात है, हर लम्हा हसीन और खास है।। जी , इसे जी भर के, कि! जिंदगी उस रब्ब की दी, सच्ची सौगात है।।।।

- श्री ए.रेनू

(English Script )

Thursday, July 7, 2022

टिप्स : बरसात के मौसम में ताजा फल और सब्ज़ी का रखरखाव

 बरसात के मौसम में ताजा फल और सब्ज़ी का रखरखाव। 


  • फल - सब्ज़ियों को खुले पानी में धोकर खाए। आप चाहे तो फल - सब्ज़ी को थोड़ी देर नमक के पानी में भीगा कर रखे ताकि कीटाणु , जीवाणु  फल - सब्ज़ी पर से उतर जाए। यदि पानी में चुटकी - भर हल्दी पाउडर डाल ले तो सोने पर सुहागा हो जाए। 


  • कुदरत फलों का उत्पादन पेड़ों पर और सब्ज़ियों का उत्पादन मिट्टी में अर्थात् खेतों में करती है। इसलिए आप अपनी किचन में इन्हें एक साथ धोने की गलती से बचें। 


  • फल और सब्ज़ी को हमेशा अलग - अलग धोए। इन्हें एक साथ धोने से फलों पर सब्ज़ी में लगी खेत की मिट्टी के कण लग जाते हैं। 


  • यह मिट्टी के कण फल, सब्ज़ी और आपकी सेहत को बरसात के मौसम में नुकसान पहुंँचा सकते हैं । 


  • फल और सब्ज़ी को सूखे कपड़े से पोंछकर, ढककर रखें।  यदि सम्भव हो, तो फलों को ज़्यादा देर तक काट कर न रखें। 


  • ( कृपया अपने विचार एवं सुझाव  comment  box में share करें।🙏 ) 


  • ( English Script )

  • barasaat ke mausam mein taaja phal aur sabzee ka rakharakhaav. 


  • phal - sabziyon ko khule paanee mein dhokar khae. aap chaahe to phal - sabzee ko thodee der namak ke paanee mein bheega kar rakhe taaki keetaanu , jeevaanu  phal - sabzee par se utar jae. yadi paanee mein chutakee - bhar haldee paudar daal le to sone par suhaaga ho jae.


  • kudarat phalon ka utpaadan pedon par aur sabziyon ka utpaadan mittee mein arthaat kheton mein karatee hai. isalie aap apanee kichan mein inhen ek saath dhone kee galatee se bachen.


  • phal aur sabzee ko hamesha alag - alag dhoe. inhen ek saath dhone se phalon par sabzee mein lagee khet kee mittee ke kan lag jaate hain.


  • yah mittee ke kan phal, sabzee aur aapakee sehat ko barasaat ke mausam mein nukasaan pahunncha sakate hain .


  • phal aur sabzee ko sookhe kapade se ponchhakar, dhakakar rakhen.  yadi sambhav ho, to phalon ko zyaada der tak kaat kar na rakhen.

  • ( krpaya apane vichaar evan sujhaav chommaint box mein shairai karen.🙏 )








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