तीन रंग तिरंगे के,
चौथा रंग चक्र का।
केसरिया ऊपर, हरा , नीचे साजे,
बीच सफ़ेदी संग, नीला चक्र भागे ।
खादी के यह खालिस, जहीन धागे,
प्रतिपल भारत के माथे पर साजे।
आन, बान और शान,
तेरी, मेरी असली पहचान ।
तिरंगा सौंदर्य, तिरंगा सौगात,
इससे साजे हर राष्ट्रीय त्योहार ।
तेरा - मेरा सबका अपना और 'प्रिय'
देख ,तिरंगा हर भारतीय जिए ।
माँ जननी, माँ भारती,
तुझे वंदन, तुझे प्रणाम,
तेरे सपूतों में , तिरंगे का पहला नाम,
कर कबूल अपने चरणों में,
हम बच्चों का सादर प्रणाम।
हम बच्चों का सादर प्रणाम।
'जय हिंद'।
- श्री ए. रेनू