हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Thursday, March 23, 2023

मार्च का यौवन

 चहके चिड़िया, कूहके कोयल,

ले आया...

समय…. 

फिर से, 

धरा पर,

 मार्च का यौवन। 


कोमल पत्ते, रंग रंगीले, 

नव यौवना से भरमीले। 

मन को भाते हाथ न आते, 

दूर शाख पर गतिमान इतराते। 


शोभा प्रकृति की बढ़ाते, 

नैनौ से मन में बस जाते, 

देख, रब्ब की!! 

 यह कारीगरी… 

नतमस्तक हम हो जाते। 🙏🙏 

                        -श्री ए. रेनू 


Wednesday, March 15, 2023

पुतला यह माटी का?

 पहन कर कपड़े उज्जले

बने आज , यह , वो… 

सब… यजमान… 

कहूँ , कहूँ  सब  'मैं' कहूँ, 

बस…… सब मेरी मान। 


जिंदगी बैठा दी दाव पर , 

बाँध घुंघर, साथ सयापे लाख, 

वह भी मस्त हो गई…. 

समझ 'खुद'  को भाग्यवान। 


बुद्धि बंद, अल्फाज़ चंद. 

श्वेतांबर के श्रेष्ठ पत्र पर , 

बस  …. बातें चंद….। 

….उसकी मनपसंद….. ।


मैं , मैं , मैं , मैं और बस मैं!!! 

मैं हूँ ,,,, मैं ही हूँ… 

जी, सबसे अच्छा। 

हाँ , सबसे सच्चा। 


देख सुन….. मत।।। 

और किसी को…. 

कहूँ…. कहूँ.. सब

 बस मैं कहूँ सब… 

मुझे सुनो….. बस

सुनो.  सुनो… बस।


रख समझ को परे, 

अक्ल को भेज परे, 

चाहे कहीं घास चरे, 

दृष्टि मायामंच पर रहे। 


कान सदा मुझ पर रहे, 

भविष्य चाहे आँच पर जले, 

भूख लगे न, न प्यास लगे, 

इतना भी तुझे ध्यान रहे। 


बैठी दाव पर जिन्दगी, 

सोचे…… 

 पुतला यह माटी का? 

न जाने?? 

किस ओर चला ??? 

              -श्री ए. रेनू 


 


Sunday, March 5, 2023

मुहब्बत और बेवफाई

 मुहब्बत का दस्तूर ही ऐसा होता है, 

कोई खून के आँसू पीता है, 

और..... 

कोई जश्न मनाता है।

कोई महफिल में सजता हैं, 

और....... 

कोई तन्हाई में सिसकता है।

वफा तड़पती है, 

वेवफाई संवरती है, 

धड़ल्ले से चहकती है। 

और......... 

आदत हो जाती है जब वफा को, 

तड़प के मर कर जी जाने की..., 

तभी.... हाँ...... तभी.!!! 

वेवफाई लौट कर आती है, 

पास वफा के, 

ना...... जी....... ना...., 

नहीं आती मनुहार को, 

बस आती है...!! 

बताने अपने अफसाने, 

अपनी आप बीती बात  बताने को, 

जी हाँ!!!.... 

वेवफाई को तहज़ीब भी नहीं होती।।!! 

                                - श्री ए. रेनू


चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...