हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Saturday, August 27, 2022

Modern life.

 प्रिय पाठक, 

प्रणाम। 

पिछले दिनों आस-पास के माहौल, व्यवहार और घटनाओं को देखते हुए प्रस्तुत रचना बरबस ही मेरी लेखनी से उमड़ आई। कृपया इसे सादर पढ़े, और अपने परिवार, समाज, देश और विशेष कर अपना और अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। 

ईश्वर आप सब को बहुतायत से आशीर्वाद दे। 


        Modern life 

इस live in, live-in के time में, 

रवैया उनका best friend सा, 

उम्मीदें उनकी boy friend सी ।

Response इनका wife सा, 

और बेड़ा -  गर्क इस life का। 

  

आज के modern time में, 

Fast changing life में, 

 ऐसा अक्सर ही दिखता है। 

हर कोई famous - face,

कहलाने को फिरता है। 

रूप - रेखा का ताना - बाना, 

गिरना - बिगड़ना न कभी भी

अखरता है। 

हनना होना, गरिमा खोना, No, 

एहसास  कहीं भी दिखता है। 


आज के modern time में, 

इन्सानियत में इन्सान, 

कभी - कभार, कहीं-कहीं ही, 

 दिखता है। 

शुक्र है, कि दिखता है।!! 

                             - श्री ए. रेनू 




Friday, August 26, 2022

निवेश

              🎯 निवेश 

आज, 

जन - जन निवेश का दिवाना है, 

सबको चाहिए धन का खज़ाना है ।

अच्छा है।।।। 

धन चीज़ों की चाबी है, 

निवेश में न कोई भी खराबी है। 

पर दिखता है….

सब।।।

चारों तरफ़ साफ़ - साफ़ ,

धन की आपा - धापी है ।

अपने पराए के परिवेश में ,

धन सदस्य सर्वोपरि है। 

हे भगवन!

 मानवता तेरे पास चली आई। 

अक्सर मानव ने ही दे ठोकर ,

जीवन से इसे निकाला है। 

    "धनी होना, धनी होना, 

धन है, तो सारा जहाँ तुम्हारा है" 

 गूँज गया चहुँ ओर, 

यह अघोषित सा नारा है ।

धन का आना अच्छा है ,

पर इसके आने - जाने में 

मन का मरना  - मर जाना 

अच्छा नहीं।।।।। ।

हे मानव!!!थम ज़रा। 

हे मानव !! संभल ज़रा। 

अंतर्मन की नगरी में भी , 

कर  दे कुछ निवेश ज़रा। 


                          -श्री ए. रेनू 



Sunday, August 14, 2022

माँ- भारती तेरे चरणों में।

 आज की फिज़ा में, 

रग- रग में,रंग-संग में, 

रंग तिरंगा, बस तिरंगा। 

फहराएगा, लहराएगा, 

जश्न - ए - आज़ादी मनाएगा ।


जन- जन का मन, 

आदर से भर जाएगा। 

जन - गण - मन भी गाएगा।

भाल गर्व से उँचा हो जाएगा। 


तन की नदियाँ में , रंग केसरी ।

धन की गठिया में ,  रंग सफ़ेदी । 

मन की बगिया में , रंग हरा ।

देखो, गर ध्यान से तो दिख जाएगा। 


मन चाहे , मन माँगें दुआ , 

आज़ादी की खुली हवा में , 

रंग सारे, भाव सारे, संस्कार सारे, 

घुल जाए, मिल जाए, भर जाए। 


तन की नदियाँ में थम जाए, 

धन की गठिया में रुक जाए, 

मन की बगिया में पक्के छ्प जाए। 

नर-नारी तिरंगी- त्रिवेणी में रंग जाए। 


हे रब्ब !  तो जीवन का मज़ा आए , 

सच में ,आज़ादी पल में फल जाए, 

रूहें - शहादत जन्नतों में खिल जाए, 

 माँ - भारती तेरे चरणों में, 

हम आज यही दुआ लाए।

                               -श्री ए. रेनू 






Saturday, August 13, 2022

मुहब्बत, शब्द और जीवन??

 शब्द इंतजार करते हैं, 

मुहब्बत भरा दिन , 

बने कैसे? 

प्रश्न पर प्रश्न?? 

मुहब्बत भरे, 

शब्द हम कहे तो 

कहे कैसे ? ? 

शिकवा हो तो, 

शिकायत से कहते। 

दुआ हो तो, 

दुआ में कहते । 

रूठे हो तो, 

मनाने को कहते  ।

जल्द घर आने, 

को कहते  ।

जुदा हो तो , 

मिलने को कहते  ।

जाते  हो तो, 

आने को कहते  ।


पर ……. 

मुहब्बत भरा दिन, 

बनाने को… 

कैसे…? क्या कह दे? 

नही पता……??? 

बस…. शब्द ज़ुबान पर, 

आने का इंतजार ही, 

करते रहे……। 

और दिन बीत गया ! ! 

इक दिन!! पता चला… 

जीवन ही बीत गया !! 

                         - श्री ए. रेनू 

चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...