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Sunday, December 3, 2023

चाबी

            


तेरे-मेरे मन की चाबी, 

एक….. 

वो भी तेरे पास में। 

और, 

मन का तू मौज़ी, 

एक, 

जगह तू टिक जाए। 

ना, 

बस की तेरे बात रे। 

काश ! 

कभी ऐसा हो जाए, 

चाबी, 

हाथ मेरे लग जाए। 

फेंकूँ, 

पार सात समंदर पार, 

खत्म, 

हो जाए सारे फसाद रे! 

घर, 

तेरा-मेरा, मेरा - तेरा की, 

उलझन, 

से मुक्त हो सारे जज़्बात ये । 

खो जाए, 

यह चाबी रब्बा!! रहे 

संग, 

मेरे, मेरा सजना, क्या दिन-क्या रात, रे। 


                         -श्री ए.रेनू 



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