आज की फिज़ा में,
रग- रग में,रंग-संग में,
रंग तिरंगा, बस तिरंगा।
फहराएगा, लहराएगा,
जश्न - ए - आज़ादी मनाएगा ।
जन- जन का मन,
आदर से भर जाएगा।
जन - गण - मन भी गाएगा।
भाल गर्व से उँचा हो जाएगा।
तन की नदियाँ में , रंग केसरी ।
धन की गठिया में , रंग सफ़ेदी ।
मन की बगिया में , रंग हरा ।
देखो, गर ध्यान से तो दिख जाएगा।
मन चाहे , मन माँगें दुआ ,
आज़ादी की खुली हवा में ,
रंग सारे, भाव सारे, संस्कार सारे,
घुल जाए, मिल जाए, भर जाए।
तन की नदियाँ में थम जाए,
धन की गठिया में रुक जाए,
मन की बगिया में पक्के छ्प जाए।
नर-नारी तिरंगी- त्रिवेणी में रंग जाए।
हे रब्ब ! तो जीवन का मज़ा आए ,
सच में ,आज़ादी पल में फल जाए,
रूहें - शहादत जन्नतों में खिल जाए,
माँ - भारती तेरे चरणों में,
हम आज यही दुआ लाए।
-श्री ए. रेनू