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Wednesday, July 13, 2022

दूर कहीं भवन में,

 दूर कहीं भवन में, 

     'थी'

इक हव्वा की बेटी,

और 

इक आदम का बेटा ।

बस जो होना था ,

वही हुआ ,

जी हाँ ।इश्क हुआ ।

काश! के मुहब्बत होती, 

तो भवन, 

भवन होता !! 

सहरा न होता। 

हव्वा ! तेरी बेटी के माथे पर टीका, 

आदम ! तेरे बेटे के सिर पर सेहरा, 

होता। 

इश्क कच्चा, 

मुहब्बत पक्की ।


जमाने में, 

इक नजर 

घुमा के देख लो। 

चाहो तो, 

आज़मा, 

के देख लो। 

- श्री ए. रेनू 


door kaheen bhavan mein,

thee
ik havva kee betee,
aur
ik aadam ka beta .
bas jo hona tha ,
vahee hua ,
jee haan .ishk hua .
kaash! ke muhabbat hotee,
to bhavan,
bhavan hota!!
sahara na hota.
havva! teree betee ke maathe par teeka,
aadam! tere bete ke sir par sehara,
hota.
ishk kachcha,
muhabbat pakkee .

jamaane mein,
ik najar
ghuma ke dekh lo.
chaaho to,
aazama,
ke dekh lo.

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Thanks ☺️

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