हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Wednesday, June 18, 2025

मन के रंग

 मन के रंग


मन के भीतर झांक के देखो,

कितने सपनों का मेला है।

कभी खुशी की धूप खिलाए,

कभी दुखों का रेला है।


मन पंछी सा उड़ता जाए,

आशाओं के आकाश में।

कभी थके, कभी बहके,

विचारों के परिपाश में।


मन सागर है भावों का,

लहर-लहर कहानियां।

कभी शांति, कभी तूफां,

जैसे बदलें जिंदगानियां।


मन को समझो, मन को साधो,

मन को उलझन में मत बांटों ।

जो मन जीते, जगजीत वही,

मन की मन से सच्ची प्रीत यही !!

                               -रेनू अख्तर 


No comments:

Post a Comment

Thanks ☺️

चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...