मन के रंग
मन के भीतर झांक के देखो,
कितने सपनों का मेला है।
कभी खुशी की धूप खिलाए,
कभी दुखों का रेला है।
मन पंछी सा उड़ता जाए,
आशाओं के आकाश में।
कभी थके, कभी बहके,
विचारों के परिपाश में।
मन सागर है भावों का,
लहर-लहर कहानियां।
कभी शांति, कभी तूफां,
जैसे बदलें जिंदगानियां।
मन को समझो, मन को साधो,
मन को उलझन में मत बांटों ।
जो मन जीते, जगजीत वही,
मन की मन से सच्ची प्रीत यही !!
-रेनू अख्तर
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