हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Wednesday, May 17, 2023

तेरी छवि

 हूबहू  थी……!! 

पर तुम नहीं थीं। 

रुबरु थी….!! 

पर तुम नहीं थीं। 


आँखें.…. खुली थीं.. ।

नींद  भी नहीं थी….!! 

धड़कन में धड़क थी.. 

सीने में तड़प भी थी। 


हे मेरे सनम, 

पर सामने तुम नहीं थीं !! 

तेरी छवि थी !!! 

तुम से अधिक हसीन थी !! 

बेजुबान थी…. 

पर बेलगाम थी। 

लाजवाब थी। 

तेरी तस्वीर…. 

 मेरे सनम, बेमिसाल थी।!! 

               -श्री ए. रेनू 


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Thanks ☺️

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