हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Sunday, December 11, 2022

शून्य

 

आसमां में शून्य, 

कि उसका ओर - छोर नही। 

माया में शून्य, 

तो वह बे-मोल नहीं। 

गर हो मनुष्य में शून्य, 

तो मनुष्य का कोई मूल्य नहीं। 


स्थान - स्थान की बात है, 

शून्य तो कभी भी बेमोल नहीं!! 

                   -श्री ए. रेनू 

13 comments:

Thanks ☺️

चांदनी रात

 🌙 चांदनी रात 🌙 नीले अम्बर की चादर तले, शांत पड़ी है सारी रात। सुनहरी चांदनी बिखरे नभ में, जैसे उतरी हो कोई बात। ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, छ...