हिंदी कविता -ज़िंदगी, देश, प्रकृति, सावन, बादल, बारिश, जुदाई, गम, ख़्याल, प्रेम, बचपन, त्योहार

Tuesday, July 12, 2022

खुश रहो ।

 बेवकूफ़ों के जनाज़े

सूने होते हैं । 

समझदारों के पीछे 

जमाने होते हैं। 

तो…. 

 तो क्या?? 

समझदार बनो। 

और खुश रहो। 

मरने से पहले भी 

और मरने के बाद भी। 

😊😊😊😊😊

-श्री ए. रेनू


(English Script)

bevakoofon ke janaaze
soone hote hain . 
samajhadaaron ke peechhe 
jamaane hote hain. 
to…. 
 to kya?? 
samajhadaar bano. 
aur khush raho. 
marane se pahale bhee 
aur marane ke baad bhee. 
😊😊😊😊😊
                - shri A. Renu 



8 comments:

Thanks ☺️

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