सोलह सावन देखते ही
वो उनके दीदार को तरसे।
कभी पूजा किए, कई व्रत किए।
फिर आई, शुभ घड़ी,
सात वचन ले, फेरे लिए ।
फिर…… अगले…
सोलह सावन अक्सर
यही सोचा किए!!!
कि धत्त !!!!
हम, यह क्या किए ? ?
फिर आ पहुँचा,
तैंतीसवां सावन !
और बोला…..
आने वाला हर सावन,
अक्सर ही,
बताता जाएगा…
कि, तुम क्या किए ?
जब काया - माया
कुम्हलाएगा।
केश में सफ़ेदी,
चेहरे की आभा,
दिल की धड़कन,
हैरानी, परेशानी,
बढ़ाएगा, घटाएगा,
तब बावरा मनवां,
खुद ही गाएगा।
कि !!
कुछ कर्म अच्छा किए,
जो तब हमने !
'फेरे लिए', 'तेरे हुए ' ।
मेरे लिए, तेरे लिए,
हम अच्छा किए,
संग - संग रहे,
हम!! अच्छा किए ।।
- श्री ए. रेनू
Magic of Savan 😊
ReplyDeleteGood thought..
God Bless!
Savan k rang....
ReplyDeleteNice one
ReplyDeleteNice one Ma'am
ReplyDeleteAwesome mam
ReplyDeleteFactual words👍🏽
ReplyDeleteWell said
ReplyDeleteNice lines ma'am
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