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Monday, June 27, 2022

सावनी - कथा

 सोलह सावन देखते ही

वो उनके दीदार को तरसे। 

कभी पूजा किए, कई व्रत किए। 

फिर आई, शुभ घड़ी,

सात वचन ले, फेरे लिए ।

फिर…… अगले… 

सोलह सावन अक्सर 

यही सोचा किए!!!

कि धत्त !!!! 

 हम, यह क्या किए ? ?

फिर आ पहुँचा, 

तैंतीसवां सावन !

और बोला….. 

आने वाला हर सावन, 

अक्सर ही, 

बताता जाएगा… 

कि, तुम क्या किए ?


जब काया - माया

कुम्हलाएगा। 

केश में सफ़ेदी,

चेहरे की आभा, 

दिल की धड़कन, 

हैरानी, परेशानी, 

बढ़ाएगा, घटाएगा, 

तब बावरा मनवां, 

खुद ही गाएगा। 

कि !! 

कुछ कर्म अच्छा किए, 

जो तब हमने !

'फेरे लिए', 'तेरे हुए ' ।

मेरे लिए, तेरे लिए, 

हम अच्छा किए, 

संग - संग रहे, 

हम!! अच्छा किए ।। 

                          - श्री ए. रेनू 





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Thanks ☺️

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