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Saturday, June 25, 2022

देश भक्ति कविता - लहर गर्व की

 

लेते हैं जब भी, 

 ' नाम 'अपने वतन का। 

मन में लहर, 

गरवीली-सी लहराती हैं। 

साँसों में सुगंध तेरी ही, 

बन साँस, 

तन में तरुणा लाती है। 


तू है , तो हम है!! 

तुझ , से ही है, 

वजूद मेरा। 

तेरे प्रयासों से ही, 

 बलवंत और जीवंत, 

रोम - रोम मेरा  ।।


मन प्रफुल्लित हो जाता, 

जब भी, 

लेते हैं, 'नाम' तेरा। 

तू रखवाला, प्राणप्रदाता 

पहचान दिलाता, 

अधिकार दिलाता, 

अधिकारी बनाता।


लेते ही जन्म भूमि पर, 

 ' भारतीय ' होने का गौरव दिलाता। 

हे! जन्मभूमि, मेरी कर्मधरा, 

तेरा बालक, तुझ पर बलिहारी जाता। 


करूँगा!! अवश्य ही , 

' मैं ' काम कुछ ऐसे, 

विश्व - कल्याण, 

हो जिससे। 

नभ, थल, जल में, 

फैले लहर गर्व की। 

और!!

जन - जन  की ज़ुबान, 

पर हो, एक ही गान। 

भारत देश है महान। 

भारत देश है महान। 

                        -श्री ए. रेनू 

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Thanks ☺️

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