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Sunday, November 13, 2022

कि जीवन खिले....

 आओ कुछ करें, 

कि जीवन खिले। 

आओ कुछ करें, 

कि ठहराव मिले ।

आओ तो देखे…… 

कि भागमभाग क्यों है ?

सौ कामों पर एक ही, 

हाथ क्यों है…..?

मेरा- मेरा करे, 

हर कोई, 

हम - तुम की तो… 

बात ही नहीं है। 


आओ… 

आओ…. 

कुछ कदम साथ चलें, 

कि कुछ आराम मिले। 

जीवन का आभास मिले, 

अपनत्व का संसार मिले। 

                    -श्री ए. रेनू 


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Thanks ☺️

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