आओ कुछ करें,
कि जीवन खिले।
आओ कुछ करें,
कि ठहराव मिले ।
आओ तो देखे……
कि भागमभाग क्यों है ?
सौ कामों पर एक ही,
हाथ क्यों है…..?
मेरा- मेरा करे,
हर कोई,
हम - तुम की तो…
बात ही नहीं है।
आओ…
आओ….
कुछ कदम साथ चलें,
कि कुछ आराम मिले।
जीवन का आभास मिले,
अपनत्व का संसार मिले।
-श्री ए. रेनू
👌
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ReplyDeleteNice 👍
ReplyDeleteAwesome lines
ReplyDeleteBahut khoobsurat 👍😍
ReplyDeleteVery nice ma'am
ReplyDelete👌
ReplyDelete👌❤️❤️
ReplyDeleteAwesome lines
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