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Sunday, November 6, 2022

बुलबुल और शिकरा

 'बुलबुल और शिकरा' 


इक नन्ही घायल, 

बुलबुल को, 

मिला… 

शिकरे यारों का राजा ।

बड़े नाज़ो से रखा, 

बड़े सालों तक रखा, 

मन के पिंजरे में रखा।

फिर इक दिन… 

पिंजरे को, 

खोला, 

बोला, 

उड़ जा…. 

कि जाता मैं…. 

लेने को अपनी रानी। 

बुलबुल..?..?. 

गुमसुम सी होली, 

चुप्पी से बोली,,... 

उड़ना मैं भूली!!! ।

शिकरे ने भरी उड़ान, 

और उड़ गया …… !!! 

                          - श्री ए. रेनू 


18 comments:

Thanks ☺️

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