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Thursday, October 20, 2022

नरम सी सर्दी

           नरम सी सर्दी 

नरम सी सर्दी में, मीठी सी ठंडक , 

लो, कुदरत ने दे दी ठंड की दस्तक।

सूरज को ताकेगा, हर एक मस्तक। 

खाएंगें मेवे ,बादाम और चिलगोजे़,

फल - सब्जियाँ और मूँगफलियाँ। 


रुत सर्दी की आई, त्योहार भी लाई। 

रंगीनी है छाई,घर-घर बँटती मिठाई। 

चेहरे हैं खिलते,ऊन-पश्मीना दिखते, 

दिखी जब रजा़ई, तबीयत खिल आई 

माँ ने नाज़ो- से बच्चों के लिए बनाई।


चंद दिन में बढ़ेगी ठंडक, बढ़ेगी सर्दी, 

पड़ेगी सर्दी, बनेगी कड़ाके की सर्दी। 

बोलेगा मन, कुदरत!

कैसी मुश्किल यह कर दी? 

सर्दी की नरमी क्यों कम कर दी? 


कुदरत तो है कुदरत…. 

चलती और चलना सिखाती। 

बढ़ती और बढ़ना सिखाती। 

हर पल को जीती 

और

 जीना सिखाती। 

                       - श्री ए. रेनू 



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Thanks ☺️

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