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Sunday, June 19, 2022

जब हम बड़े हो रहे थे, …

 जब हम बड़े हो रहे थे, ….

चलो !!!!! 

गिने…. आज….. 

कि क्या - क्या जरूरी था….???? 


शुरूआत ,मैं करती हूँ , 

आप भी कहना

अवश्य ही, 

कि… क्या - क्या जरूरी था…??? 


जब हम बड़े हो रहे थे,,,, 

तरीका, सलीका जरूरी था, 

लेने से  देना, 

ज़्यादा - जरूरी था ।

बच - बच के खर्च करना , 

जरूरी था ।

जरूरी  - खर्च करना ज़्यादा , 

जरूरी था। 

जो खरीदा है, 

वो व्यर्थ न हो, 

इस बात का ख़्याल रखना, 

जरूरी था। 

अन्न - धन - मन - मान 

नष्ट न हो, 

यह, ध्यान रखना जरूरी था। 


जो भी मैं कर रहा हूँ , 

ईश्वर स्वर्ग से देख रहे हैं !! 

इस बात को स्वीकार करना, 

सर्वोपरि था। 


मेहनत करते रहना, 

जरूरी था। 

पढ़ना-लिखना, 

जरूरी था, 

संग - संग माँ का हाथ बँटाना, 

जरूरी था ।

संग- सखियों के खेलने जाना, 

भी..... जरूरी था। 

पिता के घर आने से पहले 

माँ का संवरना, बच्चों का, 

खेल से लौट कर आ जाना, 

जरूरी था। 


घर नानी के जाना, 

खील-बताशे, दूध - मलाई , 

खा - खाकर मोटे होकर आना , 

जरूरी था। 


गर ! हो जाए, 

तबीयत किसी की भी खराब, 

तो समय पर, 

हाल पूछने जाना, 

जरूरी था। 


और भी था, बहुत कुछ, 

इतना ही मैं लिख पाई आज। 


चलो… अब आप की बारी 

कह दो, 

जब हम बड़े हो रहे थे… 

क्या - क्या था, उस समय, 

जरूरी और खास। 

                         -श्री ए. रेनू 




21 comments:

  1. Wonderful 😊.....bachpan ko poori tarah se jeena jaruri tha....Jo humne apne samay m jiya bhi....this poem is recalling alarm for us🙏😍

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  2. Very very nice, 👍🙏

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  3. Such a nostalgia, no one can ever do this better than you!

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  4. Nostalgic..
    God Bless!

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  5. Beautiful 👍👌

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  6. What a poem ! Mam Awesome 👌👌

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  7. Sahailiyon se abba banai rakhna zaroori thaa
    Katti agar ho jaye toh , jath se manana zaroori thaa
    Bachpan ok bachpan ki taranh jeena zaroori tha💕💕👍

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    Replies
    1. Beautiful lines ma'am ☺️ Thank you 😊.

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Thanks ☺️

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